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| उँकर (सं.) | उकडू, पैरों के पंजों के बल बैठना। |
| उँचान (सं.) | ऊँचाई। |
| उँटवा (सं.) | ऊँट। |
| उँटिहार (सं.) | ऊँटी दे. लेकर गाड़ी के आगे-आगे चलने वाला व्यक्ति। |
| उंडा (वि.) | औधा, मुँह के बल। |
| उकठना (क्रि.) | बीती घटनाओं को सुना-सुना कर गाली-गलौज करना। |
| उटकना (क्रि.) | दे. उकठना |
| उकेरना (क्रि.) | निकालना, रस्सी आदि की बटाई खोलना। |
| उखरू (सं.) | दे. ‘उँकरू’। |
| उखलहा (वि.) | 1. ओछी तबीयत का, नीच स्वभाव का, दोषी। 2. जादा बोलने वाला, सहजता से वास्तविक बात बता डालने वाला। |
| उखरा (सं.) | रस से पगी लाई दे. । (वि.) नंगे पैर। |
| उखानना (क्रि.) | उखाड़ना। |
| उगता (सं.) | मजदूरी का ठेका। |
| उगती (सं.) | सूर्योदय। |
| उगोना पाख (सं.) | शुक्ल पक्ष। |
| उघरा (वि.) | 1. शरीर के ऊपर वस्त्र न होना 2. खुला हुआ, बिना आवरण के। |
| उचारना (क्रि.) | खोलना। |
| उचंती (सं.) | थोडे समय के लिए लिया हुआ ऋण, अग्रिम राशि, – (वि.) चलने को उत्सुक। |
| उचना (क्रि.) | ऊँचा होना, उठना 2. जलना क्रियाशील होना। |
| उचाना (क्र.) | 1. ऊँचा करना, उठान 1. जलाना, क्रियाशील करना 3. खर्च करना। |
| उच्छिन होना (क्रि.) | 1. दृष्टि से ओझल हो जाना, अदृश्य हो जाना 2. उदास होना। |
| उछरना (क्रि.) | वमन करना। |
| उछराई (सं.) | 1. कै का आभास, उल्टी कर का मन होना 2. अत्यधिक पिटाई। |
| उछला (वि.) | लबालब (खेत, तालाब आदि के सम्बन्ध में)। |
| उछार (सं.) | वमन, कै, उल्टी। |
| उछाल-तलाव (सं.) | हैजा। |
| उछाह (सं.) | उत्साह। |
| उजारना (क्रि.) | उजाड़ना। |
| उजियार (सं.) | उजाला, प्रकाश। |
| उजियारी (वि.) | उज्ज्वल। |
| उजीर (सं.) | धोबी। |
| उज्जर (वि.) | उज्ज्वल, सफेद, स्वच्छ, साफ। |
| उझारना (क्रि.) | नष्ट करना, उजाड़ना। |
| उझालना (क्रि.) | उछालना, ऊपर फेंकना, ऊपर-नीचे करना। |
| उटंग (वि.) | वस्त्र पहनने पर अपेक्षित लंबाई से उसका कम पाया जाना, धुलने पर कपड़े का लंबाई में सिकुड़ना। |
| उटकट (सं) | ऊब। दे. ‘असकरट’। – (.वि.) उत्कट, अत्यधिक। |
| उटकटाना (क्रि.) | दे. ‘असकटाना’। |
| उटकना (क्रि.) | ताना देना, व्यंग्य करना, उलाहना देना, अनपेक्षित पुरानी बातें कहना। |
| उटकुट (वि.) | दे. ‘उटकट’। |
| उठलँगरी (वि.) | स्त्रियों की एक गाली, जिसमेँ दुश्चरित्रता का बोध समाहित है। |
| उड़ासना (कि.) | बिस्तर उठाना, बिस्तर समेटना। |
| उडि़या (सं) | 1. उड़ीसा का निवासी। 2. सँवरा जाति की एक उपजाति। |
| उडि़याना (कि.) | 1. उड़ना 1. उड़ाना । |
| उड़ेरा (वि.) | आकस्मिक। |
| उढ़ना (सं) | पहनने या ओढूने का वस्त्र, चादर, ओढनी। -(क्रि) ओढ़ना। |
| उढ़रिया (सं.) | 1. भगाई हुई या भागी हुई औरत 2. विवाह का एक प्रकार। दे. ‘उढरी’। |
| उढ़री (सं.) | पति या पिता के घर को छोडकर भागी हुई औरत। |
| उढ़ेरना (क्रि.) | खाली करना। |
| उतरना (सं.) | एक प्रकार का कर्णाभूषण। – (क्रि) उतरना, नीचे जाना। |
| उतलंग (वि.) | 1. ऊधम करने वाला। 2. उघम मचाने वाला। |
| उतान (क्रि. वि.) | पीठ के बल, सीधे चित्त। उत्तान। |
| उतान भँसेड़ा (वि.) | ऊटपटाँग, अव्यवस्थित, अनियमित। |
| उतारू (सं.) | ढलान। |
| उतियाइल (वि.) | नरटखट, ऊधमी, उतावला। |
| उतेरना (क्रि.) | गीले खेत में बीज फेंककर बौना। |
| उतेरा (सं.) | उतेरने (दे. ‘उतेरना’) के लिए बीज। |
| उत्ता-धुर्रा (वि.) | अनियंत्रित तरीके से, मनमाने ढ़ग से। – (क्रि. वि.) जल्दी-जल्दी। |
| उत्तिम (वि.) | उत्तम। |
| उत्ती (सं.) | 1. पूर्व दिशा 2. सूर्योदय का काल। |
| उत्थल (वि.) | उथला। |
| उदंत (सं.) | जिस शावक के दूध के दाँत न टूटे हों। |
| उद (सं.) | 1. प्रेत, मसान 2. मुर्दो को उखाड कर खानेवाला एक जंगली जानवर। |
| उदकना (क्रि.) | उछलना। |
| उदबास (सं.) | उपद्रव। – (वि.) उपद्रवी। |
| उदबिदहा (वि.) | उत्पात्त मचाने वाला, गडबड करने वाला, ऊधमी, उथल-पुथल करने वाला। |
| उदलना (क्रि.) | 1. बोए गए बीजों का उमस के कारण बेकार हो जाना 2. भेलवा दे. के प्रभाव से फोड़े हो जाना। |
| उदाली (सं.) | अपव्यय। |
| उदीम (सं.) | उद्यम, परिश्रम, यत्न। |
| उधवा (सं.) | मिसाई (दे. ‘मिसना’) करके रखा हुआ अनाज का ढेर। |
| उधाना (क्रि.) | टिकाना। |
| उधार (सं) | ऋण। |
| उधोनी (क्रि.) | समाप्त करना। |
| उन कर (सर्व.) | उन का, उन के, उन की। |
| उन खर (सर्व.) | दे. ‘उन कर’। |
| उन खर ले (सर्व.) | उन्हीं से। |
| उनारना (क्रि.) | दे. ‘ओनारना’। |
| उन्ना (सं.) | दे. ‘उढना’। — (वि.) खाली। |
| उन्हों (सं.) | कपड़ा। |
| उन्हारी (सं.) | रबी की फसल, गर्मी की फसल, दलहन की फसल। |
| उपनना (क्रि) | मार आदि का निशान दिखाई पडना, कोई भी चिह्न या वस्तु अचानक दिखाई पडना, उत्पन्न होना। |
| उपकाना (क्रि) | उखाड़ना। |
| उपत के (क्रि. वि.) | अपनी ओर से, स्वेच्छा से, स्वयं होकर। |
| उपटना (क्रि.) | दे. ‘उबवकना’। |
| उपदरा (सं) | उपद्रव, उत्पात्, ऊधम। (वि.) उपद्रवी। |
| उपदरी (वि. स्त्री.) | उपद्रवी। |
| उपर (क्रि. वि.) | ऊपर। (पर.) पर। |
| उपरना (सं) | दुपट्टा। |
| उपर सँस्सी (सं.) | साँस का ऊपर चलने का क्रम। |
| उपरहा (वि.) | आवश्यकता से अधिक, उपयोग के अतिरिक्त बचा हुआ। |
| उपरोहित (सं.) | पुरोहित, पंडित। |
| उपरौना (सं.) | दे. ‘पुरौनी’। |
| उपला (सं.) | सूखा हुआ गोबर। दे. ‘बिनिया छेना’। |
| उपसहिन (सं.) | उपवास रखने वाली स्त्री। |
| उपाई (वि.) | कुचक्री, गड़बड़ करने वाला, उपद्रवी। |
| उपास (सं) | उपवास। |
| उफनना (क्रि) | उबल कर पात्र से बाहर निकलना। |
| उफलना (क्रि.) | सतह पर तैर आना, सतह पर आ जाना। |
| उबकना (क्रि.) | 1. उभरना 2. उखड़ना। |
| उबजना (क्रि.) | उत्पन्न होना, उपजना (विशेषकर घनत्व के साथ)। |
| उबड़ी (वि.) | औधा, पेट के बल। |
| उबड़ी परना (क्रि.) | किसी चीज को पाने के लिए टूट पडना। |
| उबरना (क्रि.) | शेष रहना, निवृत होना, बचना। |
| उबारना (क्रि.) | मुक्त करना, उद्धार करना, उत्पत्ति में सहायता देना। |
| उभुक-चुभुक होना (क्रि.) | 1. डूबना-उतराना 2. आगा-पीछा करना, अनिश्चय की स्थिति में होना। |
| उबुक-चुबुक होना (क्रि.) | दे. उभुक-चुभुक होना |
| उमन (सर्व.) | वे। |
| उम्मर (सं.) | 1. आयु, 2. मीठापन। |
| उम्हर (वि.) | अत्यधिक मीठा। |
| उरई (सं.) | 1..खस की घास 2. एक प्रकार का धान। |
| उरई जर (सं.) | उरई की जड़ अर्थात् खस। |
| उरकना (क्रि.) | 1. कम पडना 2. समाप्त होना। |
| उरकहा (सं.) | फटने वाली जमीन। |
| उरभठ (वि.) | ऊबड़-खाबड़। |
| उरमाल (सं.) | रूमाल। |
| उररना (क्रि.) | खींचना, खींचकर निकालना। |
| उरला (वि.) | पीछे भार अधिक होने से आगे के हिस्से के उठ जाने की स्थिति, उठंग होने की स्थिति। |
| उल्ला (वि.) | दे. उरला |
| उरिद (सं.) | उर्द। |
| उरेरना (क्रि.) | बनाना। |
| उर्री-पुर्री (वि.) | लबालब। दे. उछला। |
| उर्रु (वि.) | कड़ा, सूखा। |
| उलँडना (क्रि.) | उल्टा हो जाना, संतुलन बिगड जाने के कारण लुढ़क पडना। |
| उलचना (क्रि.) | खाली करना, उलीचना। |
| उलदना (क्रि.) | औधा कर के ढालना, उलटना। |
| उलफुलहा (वि.) | कम बुद्धिवाला, प्रशंसा सुन कर प्रसन्न हो जानेवाला। |
| उलफुलाना (क्रि) | मतलब साधने के लिए उत्साहित करना। |
| उलरना (क्रि.) | 1. गाडी का पीछे से वजनी होने की स्थिति में असंतुलित हो जाना 2. ढीला होना 3. ढीला करना। 4. बटी हुई रस्सी का बट खुलना। |
| उलरुवा (सं.) | उलरने (दे. ‘उलरना) की स्थिति मं गाडी को सहारा देने के लिए अड़ाई गई लकड़ी। |
| उलार (वि.) | दे. उरला। |
| उलेंडा (वि.) | दे. उछ़ेरा। |
| उल्लुर (वि.) | 1. दे, ‘उरला’ 2. सुस्त, ढीला 3. कोमल । |
| उल्हवा (वि.) | कोमल (पत्ते)। |
| उल्होना (क्रि.) | अंकुरित होना, कोंपल फूटना। |
| उसकारना (क्रि.) | पड़ी हुई वस्तु को खड़ा करना या उठाना। |
| उसनना (कि.) | उबालना। |
| उसना (वि.) | उबाला हुआ। |
| उसनिंदा (वि.) | निद्रातुर, जिसकी नींद पूरी नहीं हुई हो, उनींदा। |
| उसयाइल (वि.) | 1. सूजा हुआ (अंग-विशेष)। 2. मैला-कुचैला, गंदा, फूहड। |
| उसरना (क्रि.) | कार्य समाप्त होना, निवृत्त होना। |
| उसराना (क्रि.) | कार्य समाप्त करना, निबटाना। |
| उसलती (वि.) | उठता हुआ, बंद होता हुआ, उचटता हुआ। |
| उसलना (क्रि.) | 1. उठ कर चला जाना 9. उखड़ना |
| उसालना (क्रि.) | जमी हुई वस्तु को धीरे-धीरे उठाना। |
| उसीसा (सं.) | 1. सिरहाना 2. सिर को टिकाने का साधन, तकिया। |
| उसुआना (क्रि.) | सूजना। |
| उसुर-पुसुर (क्रि. वि.) | उकताकर, किसी परेशानी से बेचैनी की स्थिति। |
| उहॉं (क्रि. वि.) | वहाँ। |
| उही मन ला (सर्व.) | उन को। |
| उही (सर्व.) | 1. वही 2. उसी। |
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| ऊँच (वि.) | ऊँचा, ऊँची जाति का, बड़ा। |
| ऊँटी (सं.) | गाड़ी टिकाने के लिए प्रयुक्त होनेवाली विशेष तरह से तैयार की गई लकड़ी जिसके नीचे की ओर दो पाये हों, लाठी। |
| ऊँधस (सं.) | ऊधम। |
| ऊना (कि.) | उदित होना। – (वि.) खाली, कम, न्यून। दे. ‘उन्ना’। |
| ऊमस (स.) | उमस। |
| ऊल (सं.) | 1. संतुलन 2. गिल्ली को ऊँचा उछालने का कार्य। |
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Mama Pranam- ek aur word add kar sakte hai shabd hai ‘ulandbaanti’ hindi me ek prakar khel jisme dir k bal ulate hai.
Gajab Sughghar.
उतअइल – उदण्ड उपद्रवी
इसे जोडे